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राष्ट्रीय शोक क्या होता है? राष्ट्रीय शोक में क्या-क्या बदल जाता है?

आपने बहुत बार ये सुना होगा की देश में राष्ट्रीय शोक प्रकट किया गया है. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है की ये राष्ट्रीय शोक क्या होता है और जब देश में राष्ट्रीय शोक लगता है तो उसमे क्या क्या बदल जाता है. और देश की जनता पर उसका क्या असर पड़ता है. आज के इस लेख में हम लोग इसी पर बात करेंगे की आखिर ये राष्ट्रीय शोक क्या होता है और इसके क्या मतलब होता है?

राष्ट्रीय शोक क्या होता है?
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राष्ट्रीय शोक क्या होता है?

राष्ट्रीय शोक जिसे अंग्रेजी में नेशनल मॉर्निंग (National Mourning) कहा जाता है देश के किसी बड़े नेता या गणमान्य व्यक्ति के निधन पर दुख प्रकट करने हेतु घोषित किया जाता है। राष्ट्रीय शोक के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर गणमान्य व्यक्ति की मृत्यु पर दुःख व संवेदना प्रकट की जाती है जिसने राष्ट्रीय हित में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है. ऐसा देश के लिए मायने रखने वाले किसी विदेशी मंत्री या बड़े हितकारी पुरुष को श्रदांजली देने के लिए भी देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया जा सकता है. हाल फिलहाल में हमारे देश भारत में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री सिंजो आबे की मौत पर राष्ट्रीय शोक प्रकट किया गया था.

राष्ट्रीय शोक कितने दिन का होता है?

वैसे तो राष्ट्रीय शोक के लिए कोई भी समय सीमा निर्धारित नहीं है परंतु यदि आज तक भारत में राष्ट्रीय शोक का इतिहास देखा जाए तो आज तक कम से कम एक दिन और अधिक से अधिक 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है जो कि विभिन्न राजनेताओं, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व राष्ट्रपति तथा अपने-अपने क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों के निधन पर घोषित किया जा चुका है.

राष्ट्रीय शोक में क्या-क्या बदल जाता है?

राष्ट्रीय शोक में सरकार के निर्णय पर सरकारी कार्यालय तथा कॉलेजों को बंद किया जाता है (यदि आदेश हो तभी) व पूरे राजकीय सम्मान के साथ गणमान्य विशेष व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है तथा राष्ट्रीय शोक के चलते छोटे-बड़े सभी सरकारी उत्सव रद्द कर दिए जाते हैं. इसके अलावा दूरदर्शन तथा आकाशवाणी पर शोक धुन बजाई जाती है. एक सबसे बड़ी बात उन सभी इमारतों पर जहां पर नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है वहां पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया जाता है जो कि राष्ट्रीय शोक का प्रतीक होता है. इसके अलावा

  • देश में और देश के बाहर स्थित भारतीय दूतावास और उच्चायोग में भी राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाया जाता है।
  • राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज अर्थात तिरंगे में लपेटा जाता है।
  • इस दौरान दिवंगत हस्ती को पूर्ण सैन्य सम्मान दिया जाता है। इसमें मिलिट्री बैंड द्वारा ‘शोक संगीत’ बजाया जाता है और इसके बाद 21 बंदूकों की सलामी दी जाती है।
  • स्वतंत्र भारत में राजकीय सम्मान के साथ पहला अंतिम संस्कार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का हुआ था।

राष्ट्रीय शोक में स्कूल बंद रहते हैं क्या?

राष्ट्रीय शोक दिवस पर स्कूलों का बंद होना या खुले रहना सरकार की अधिसूचना पर निर्भर करता है. यदि किसी वर्तमान बड़े पद के नेता अथवा किसी गणमान्य व्यक्ति की मृत्यु होती है तो सरकार सभी दफ्तर, ऑफिस या सकूलों को बंद रखने का आदेश दे सकती है.

राष्ट्रीय शोक की अधिसूचना कैसे जारी होती है ?

भारत में किसी भी गणमान्य व्यक्ति की मृत्यु के बाद सरकार द्वारा उनके निधन की घोषणा की जाती है, इसके साथ ही सरकार द्वारा एक राजपत्र अधिसूचना काली पट्टी के साथ जारी की जाती है। राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका देने के निर्देश के साथ राजकीय शोक भी घोषित किया जाता है। इसी के साथ जरूरी सूचनाये भी भेज दी जाती है जो राष्ट्रीय शोक के दिन सभी राज्यों और सरकारी दफ्तरों को मानना आवश्यक होता है.

राजकीय अंत्येष्टि की जानकारी (State Funeral Information)

राजकीय अंत्येष्टि के लिए गृह मंत्रालय द्वारा राजपत्र अधिसूचना जारी की जाती है।  रक्षा मंत्रालय द्वारा अंतिम संस्कार के लिए सभी व्यवस्थाए की जाती है. भारत के पूर्व परधानमंत्री श्री अटल जी की मृत्यु के पश्चात तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण नें व्यक्तिगत रूप से अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की थी। राष्ट्रीय शोक दिवस wikipedia पर आप यहाँ से पढ़ सकते है.

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इस लेख में हमने आपको राष्ट्रीय शोक क्या होता है? और राष्ट्रीय शोक में क्या-क्या बदल जाता है? के बारे में जानकारी दी है. उम्मीद है की आपको यह लेख पसंद आया होगा. यदि यह लेख अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ इसको Share अवश्य करे ताकि उनको भी यह जानकारी मिल सके. राष्ट्रीय शोक क्या होता है? पर कुछ faq’s निचे भी दिए गये है आप उनके बारे में भी अवश्य पढ़े.

राष्ट्रीय शोक क्या होता है?

देश के किसी बड़े नेता या गणमान्य व्यक्ति के निधन पर दुख प्रकट करने हेतु घोषित किया जाता है।

राष्ट्रीय शोक पर क्या होता है?

उन सभी इमारतों पर जहां पर नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है वहां पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया जाता है जो कि राष्ट्रीय शोक का प्रतीक होता है.

राष्ट्रीय शोक कितने दिन का होता है?

राष्ट्रीय शोक के लिए कोई भी समय सीमा निर्धारित नहीं है परंतु यदि आज तक भारत में राष्ट्रीय शोक का इतिहास देखा जाए तो आज तक कम से कम एक दिन और अधिक से अधिक 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है.

भारत का झंडा कब झुकता है?

राष्ट्रीय शोक के दिन भारत का झंडा आधा झुका रहता है.

राष्ट्रीय शोक में स्कूल बंद रहते हैं क्या?

राष्ट्रीय शोक में स्कूल का बंद होना या खुला रहना सरकार की अधिसूचना पर निर्भर करता है.

राष्ट्रीय शोक दिवस कब मनाया जाता है?

देश के किसी बड़े नेता या गणमान्य व्यक्ति के निधन पर दुख प्रकट करने हेतु घोषित किया जाता है। राष्ट्रीय शोक के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर गणमान्य व्यक्ति की मृत्यु पर दुःख व संवेदना प्रकट की जाती है.

3 Comments

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