धर्म-आस्था

आखिर कौन हैं भगवान शिव ? Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi ?

आपने भगवान शिवजी के बारे में बहुत कुछ सुना, पढ़ा और देखा होगा. इतना कुछ देखने और सुनने के बाद अक्षर मन में ये सवाल आने लगता है की आखिर भगवान शिव है कौन? (Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi Me). आज के इस लेख में हम आपके इन्ही सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे की आखिर भगवान शिव कौन है? और उनके पास ऐसा क्या है की पूरी दुनिया उनको अपना आराध्य मानती है.

भगवान शिव कौन हैं? Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi में?

शिव संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है, कल्याणकारी या शुभकारी। शिव भगवान हैं। शिव का अर्थ है कल्याण। जो सदैव ही कल्याण करें वो शिव हैं। भगवान शिव देवों के भी देव महादेव हैं। ये सृष्टि के संहारकारक हैं। ब्रह्मा सृष्टि को बनाते हैं, विष्णु उसका पालन करते हैं और शिव जी उनका संहार करते हैं।

शिव दो शब्दों से मिलकर बना है. शि और व्. ‘शि’ का अर्थ है, पापों का नाश करने वाला, जबकि ‘व’ का अर्थ देने वाला यानी दाता होता है।

भगवान शिव के अनेक नाम हैं। इनमें रूद्र, पशुपतिनाथ, अर्धनारीश्वर, महादेव, भोला, नटराज, महेश, शंकर आदि प्रमुख हैं। ॐ नमः शिवाय इनका पंचाक्षर मन्त्र है। केवल शिव शिव कहने मात्र से ही कहने वाले और सुनने वाले का कल्याण होता है। हम पढ़ रहे है Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi में?

Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi
Kon hai bhagwan shiv

क्या है शिवलिंग…??

बाबा भोलेनाथ को अक्षर शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है. शिवलिंग के बारे में बहुत से लोगो ने गलत धारणा बना के रखी है. लोग अक्षर शिवलिंग को शिव का प्राइवेट पार्ट समझने की भूल करते है. जबकि शिवलिंग एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है शिव का चिह्न. प्राइवेट पार्ट के लिए संस्कृत भाषा में शिन्न शब्द का प्रयोग किया जाता है. हम पढ़ रहे है Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi में?

शिव और शंकर में क्या अंतर है?

शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है, लोग कहते हैं- शिव शंकर भोलेनाथ। इस तरह अनजाने में ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। असल में, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है।

शिव ने सृष्टि की स्थापना, पालना और विनाश के लिए क्रमश: ब्रह्मा, विष्णु और महेश (महेश भी शंकर का ही नाम है) नामक तीन सूक्ष्म देवताओं की रचना की है। इस तरह शिव ब्रह्मांड के रचयिता हुए और शंकर उनकी एक रचना। भगवान शिव को इसीलिए महादेव भी कहा जाता है। इसके अलावा शिव को 108 दूसरे नामों से भी जाना और पूजा जाता है।

शिव को नीलकंठ क्यों कहते है ?

भगवान शिव से बड़ा सृष्टि का चिंतक और कौन हो सकता है। समुद्र मंथन को जरा याद करिये। जब देवता और दैत्यों के बीच में अमृत को लेकर सागर मंथन हो रहा था। तब उस मंथन में सबसे पहले कालकूट विष निकला था। हर जगह लोग मरने लगे, सृष्टि की सबको चिंता होने लगी। तब भगवान शिव ने विष को पीया और सृष्टि को संहार होने से बचाया। विष पीने के कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और महादेव का नाम पड़ा नील कंठ। ( हम पढ़ रहे है Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi में?)

शिव को भोला बाबा क्यों कहते है?

आपने अक्षर सुना होगा की लोग अक्षर शिव को भोले बाबा या भोले भंडारी कहते है. लेकिन इसके पीछे की वजह शायद ही आपको पता हो. उनके इस नाम के पीछे एक बहुत ही मजेदार कहानी है.

शिव पुराण में एक शिकारी की कथा है। एकबार उसे घर जाने में में देर हो गई। अपने आस पास कुछ विश्राम का स्थान ना देखकर उसने जंगल में एक बेल वृक्ष पर रात बिताने का निश्चय किया। जब घने जंगल में उसे अँधेरी रात में दर लगने लगा तो उसने जागते रहने की एक तरकीब सोची। वह सारी रात एक-एक पत्ता तोड़कर नीचे फेंकता रहा।

उसे लगा था की इससे उसकी आँख नहीं लगेगी और जंगली जानवरों से भी शावधान रहेगा. इसके अलावा इस काम के पीछे उसका कोई और मकशद नहीं था. लेकिन उसी पेड़ के निचे एक शिवलिंग था। और कथानुसार, बेल के पत्ते शिव को बहुत प्रिय हैं।

शिवलिंग पर प्रिय पत्तों का अर्पण होते देख शिव प्रसन्न हो उठे, जबकि शिकारी को अपने शुभ काम का अहसास न था। उन्होंने शिकारी को दर्शन देकर उसकी मनोकामना पूरी होने का वरदान दिया। कथा से यह साफ है कि शिव कितनी आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। इसी के बाद भगवन शिव का नाम भोले बाबा या भोले भंडारी पड गया.

शिव का स्वरूप कैसा है?

भगवान शिव का रूप-स्वरूप जितना विचित्र है, उतना ही आकर्षक भी। शिव जो धारण करते हैं, उनके भी बड़े व्यापक अर्थ हैं. लेकिन शिव को समझना भी आसन नहीं है. शिव का स्वरूप बहुत ही निराला है.

जटाएं : शिव की जटाएं अंतरिक्ष का प्रतीक हैं।

चंद्र : चंद्रमा मन का प्रतीक है। शिव का मन चांद की तरह भोला, निर्मल, उज्ज्वल और जाग्रत है।

त्रिनेत्र : शिव की तीन आंखें हैं। इसीलिए इन्हें त्रिलोचन भी कहते हैं। शिव की ये आंखें सत्व, रज, तम (तीन गुणों), भूत, वर्तमान, भविष्य (तीन कालों), स्वर्ग, मृत्यु पाताल (तीनों लोकों) का प्रतीक हैं।

सर्पहार : सर्प जैसा हिंसक जीव शिव के अधीन है। सर्प तमोगुणी व संहारक जीव है, जिसे शिव ने अपने वश में कर रखा है।

त्रिशूल : शिव के हाथ में एक मारक शस्त्र है। त्रिशूल भौतिक, दैविक, आध्यात्मिक इन तीनों तापों को नष्ट करता है।

डमरू : शिव के एक हाथ में डमरू है, जिसे वह तांडव नृत्य करते समय बजाते हैं। डमरू का नाद ही ब्रह्मा रूप है।

मुंडमाला : शिव के गले में मुंडमाला है, जो इस बात का प्रतीक है कि शिव ने मृत्यु को वश में किया हुआ है।

छाल : शिव ने शरीर पर व्याघ्र चर्म यानी बाघ की खाल पहनी हुई है। व्याघ्र हिंसा और अहंकार का प्रतीक माना जाता है। इसका अर्थ है कि शिव ने हिंसा और अहंकार का दमन कर उसे अपने नीचे दबा लिया है।

भस्म : शिव के शरीर पर भस्म लगी होती है। शिवलिंग का अभिषेक भी भस्म से किया जाता है। भस्म का लेप बताता है कि यह संसार नश्वर है।

वृषभ : शिव का वाहन वृषभ यानी बैल है। वह हमेशा शिव के साथ रहता है। वृषभ धर्म का प्रतीक है। महादेव इस चार पैर वाले जानवर की सवारी करते हैं, जो बताता है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष उनकी कृपा से ही मिलते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र क्या है ?

शिव के साधक को न तो मृत्यु का भय रहता है, न रोग, न शोक का। शिव तत्व उनके मन को भक्ति और शक्ति का सामर्थ्य देता है। शिव तत्व का ध्यान महामृत्युंजय मंत्र के जरिए किया जाता है। इस मंत्र के जाप से भगवान शिव की कृपा मिलती है। शास्त्रों में इस मंत्र को कई कष्टों का निवारक बताया गया है। 

यह मंत्र यों हैं : ओम् त्र्यम्बकं यजामहे, सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनात्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।

भगवान शिव के बारे में एक श्लोक है जो आप लोगो ने अक्षर सुना भी होगा.

कर्पूरगौरम करुणावतारम, संसारसारं भुजगेंद्रहारम।
सदावसंतम हृदयारविन्दे, भवम भवानी सहितं नमामि।।

अर्थात- कर्पूर के समान चमकीले गौर वर्णवाले, करुणा के साक्षात् अवतार, इस असार संसार के एकमात्र सार, गले में भुजंग यानि सांप की माला डाले, भगवान शंकर जो माता भवानी के साथ भक्तों के हृदय कमल में सदा सर्वदा बसे रहते हैं, हम उन देवाधिदेव की वंदना करते हैं।

यह भी पढ़ें- शिव पूजा में भूलकर भी न शामिल करें ये चीजें

उम्मीद है की आप लोगो को भगवान् शिव का यह लेख Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi me पसंद आया होगा. और आपने सिखा होगा की आखिर क्यों ये सारा संसार भोले बाबा का दीवाना है. अगर लेख Bhagwan Shiv Kaun hai Hindi ? पसंद आया हो तो हमे कमेंट में “जय भोले नाथ’ लिखकर ज़रूर बताये. जय शिव शम्भू…

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